📰 अष्टमी पूजा विधि:
📅 12-10-2026
सुबह की शुरुआत स्नान और साफ कपड़े (गुलाबी रंग - महागौरी का रंग) से करें।
माता की पोशाक को गुलाबी रंग में बदलें
विशेष भोग तैयार करें: हलवा, पूरी, चना - पारंपरिक अष्टमी प्रसाद
सर्वप्रथम माता को भोग अर्पित करें, फिर परिवार में बाँट दें।
धूप, दीया, कपूर, शंख से पूर्ण आरती करें
दुर्गा अष्टमी स्तोत्र का पाठ करें या देवी महात्म्य (सप्तशती) पाठ सुनें
कन्या पूजा विधि:
नौ युवतियों (आदर्श रूप से 2-10 वर्ष की आयु की) को आमंत्रित करें — जिनमें से प्रत्येक नवदुर्गा के एक रूप का प्रतिनिधित्व करती हो।
उनके पैरों को साफ पानी से धोएं (पाद प्रक्षालन)।
प्रत्येक लड़की के माथे पर तिलक लगाएं
प्रत्येक लड़की को हलवा-पूरी-चना दें।
प्रत्येक लड़की को एक छोटा सा उपहार (चूड़ियाँ, लाल चुनरी या बालों के आभूषण) और दक्षिणा (₹11, ₹21 या क्षमता के अनुसार) दें।
उनके चरणों को वैसे ही स्पर्श करें जैसे माता के चरणों को करते हैं—वे इस दिन देवी का साक्षात रूप हैं।
कन्या पूजा अष्टमी या नवमी दोनों ही शुभ तिथियों पर की जा सकती है। कई परिवार दोनों ही दिन कन्या पूजा करते हैं।